Bhagavad Gita 6.28 — 28
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 28
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युञ्जन्नेवं सदात्मानं योगी विगतकल्मषः |सुखेन ब्रह्मसंस्पर्शमत्यन्तं सुखमश्नुते |
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yuñjannevaṃ sadātmānaṃ yogī vigatakalmaṣaḥ .sukhena brahmasaṃsparśamatyantaṃ sukhamaśnute
📖 सरल हिंदी अर्थ
वह पाप रहित योगी इस प्रकार निरंतर आत्मा को परमात्मा में लगाता हुआ सुखपूर्वक परब्रह्म परमात्मा की प्राप्ति रूप अनन्त आनन्द का अनुभव करता है। २८
🌸 English Meaning
The sinless Yogi, thus uniting his self constantly with God, easily enjoys the eternal Bliss of oneness with Brahma.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 28
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
