Bhagavad Gita 6.26 — 26
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 26
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यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् |ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत् |
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yato yato niścarati manaścañcalamasthiram .tatastato niyamyaitadātmanyeva vaśaṃ nayet
📖 सरल हिंदी अर्थ
यह स्थिर न रहने वाला और चञ्चल मन जिस-जिस शब्दादि विषय के निमित्त से संसार में विचरता है, उस विषय से रोककर यानी हटाकर इसे बार-बार परमात्मा में निरुद्ध करे |
🌸 English Meaning
Drawing back the restless and fidgety mind from all those objects after which it runs, he should repeatedly fix it on God.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 26
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
