Bhagavad Gita 6.25 — 25
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 6 | श्लोक 25
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शनैः शनैरुपरमेद् बुद्ध्या धृतिगृहीतया |आत्मसंस्थं मनः कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत् |
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śanaiḥ śanairuparamed buddhyā dhṛtigṛhītayā .ātmasaṃsthaṃ manaḥ kṛtvā na kiñcidapi cintayet
📖 सरल हिंदी अर्थ
क्रम-क्रम से अभ्यास करता हुआ उपरति को प्राप्त हो तथा धैर्य युक्त बुद्धि के द्वारा मन को परमात्मा में स्थित करके परमात्मा के सिवा और कुछ भी चिन्तन न करे। २५
🌸 English Meaning
Gradually, with the mind fixed on the Supreme, and with firm determination, one should not think of anything else.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 6, श्लोक 25
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
