Bhagavad Gita 5.8 — 8
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 5 | श्लोक 8
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नैव किञ्चित्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित् |पश्यञ्शृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपञ्श्वसन् |
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naiva kiñcitkaromīti yukto manyeta tattvavit .paśyañśruṇvanspṛśañjighrannaśnangacchansvapañśvasan
📖 सरल हिंदी अर्थ
तत्त्व को जानने वाला सांख्य योगी तो देखता हुआ, सुनता हुआ, स्पर्श करता हुआ, सूंघता हुआ, भोजन करता हुआ, गमन करता हुआ, सोता हुआ, श्वास लेता हुआ भी निःसन्देह ऐसा मानता है कि मैं कुछ भी नहीं करता हूँ |
🌸 English Meaning
The Sankhyayogi, however, who knows the reality of things, must believe, even though seeing, hearing, touching, smelling, eating or drinking, walking, sleeping, breathing, that he does nothing.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 5, श्लोक 8
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
