Bhagavad Gita 5.29 — 29
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 5 | श्लोक 29
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भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् |सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति |
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bhoktāraṃ yajñatapasāṃ sarvalokamaheśvaram .suhṛdaṃ sarvabhūtānāṃ jñātvā māṃ śāntimṛcchati
📖 सरल हिंदी अर्थ
मेरा भक्त मुझको सब यज्ञ और तपों का भोगने वाला, सम्पूर्ण लोकों के ईश्वरों का भी ईश्वर तथा सम्पूर्ण भूत-प्राणियों का सुहृद अर्थात् स्वार्थरहित दयालु और प्रेमी, ऐसा तत्व से जानकर शान्ति को प्राप्त होता है |
🌸 English Meaning
Having Known Me in reality as the enjoyer of all sacrifices and austerities, the supreme Lord of all the worlds, and the disinterested friend of all beings, My devotee attains peace.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 5, श्लोक 29
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
