Bhagavad Gita 5.23 — 23
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 5 | श्लोक 23
❖ ───── ✦ ───── ❖
शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् |कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः |
❧ ✦ ❧
śaknotīhaiva yaḥ soḍhuṃ prākśarīravimokṣaṇāt .kāmakrodhodbhavaṃ vegaṃ sa yuktaḥ sa sukhī naraḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो साधक इस मनुष्य शरीर में, शरीर का नाश होने से पहले- पहले ही काम-क्रोध से उत्पन्न होने वाले वेग को सहन करने में समर्थ हो जाता है, वही पुरुष योगी है और वही सुखी है|
🌸 English Meaning
He who is able to endure the force of desire and anger born of the mind before the destruction of the body, he is a yogi and he is happy.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 5, श्लोक 23
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
