Bhagavad Gita 4.6 — 6
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 6
❖ ───── ✦ ───── ❖
अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन् |प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया |
❧ ✦ ❧
ajo.api sannavyayātmā bhūtānāmīśvaro.api san .prakṛtiṃ svāmadhiṣṭhāya sambhavāmyātmamāyayā
📖 सरल हिंदी अर्थ
मैं अजन्मा और अविनाशी स्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ |
🌸 English Meaning
Though birthless and deathless, and the Lord of all beings, I manifest Myself through My own Yogamaya, keeping My Natureunder control.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 6
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
