Bhagavad Gita 4.41 — 41
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 41
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योगसंन्यस्तकर्माणं ज्ञानसञ्छिन्नसंशयम् |आत्मवन्तं न कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय |
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yogasaṃnyastakarmāṇaṃ jñānasañchinnasaṃśayam .ātmavantaṃ na karmāṇi nibadhnanti dhanañjaya
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे धनंजय! जिसने कर्मयोग की विधि से समस्त कर्मों का परमात्मा में अर्पण कर दिया है और जिसने विवेक द्वारा समस्त संशयों का नाश कर दिया है, ऐसे वश में किये हुए अन्तःकरण वाले पुरुष को कर्म नहीं बाँधते |
🌸 English Meaning
Arjuna, actions do not bind him who has dedicated all his actions to God according to the spirit of Karmayoga, whose doubts have been torn to shreds by wisdom, and who is self-possessed.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 41
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
