Bhagavad Gita 4.4 — 4
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 4
❖ ───── ✦ ───── ❖
अर्जुन उवाच |अपरं भवतो जन्म परं जन्म विवस्वतः |कथमेतद्विजानीयां त्वमादौ प्रोक्तवानिति |
❧ ✦ ❧
arjuna uvāca .aparaṃ bhavato janma paraṃ janma vivasvataḥ .kathametadvijānīyāṃ tvamādau proktavāniti
📖 सरल हिंदी अर्थ
अर्जुन ने कहा— आपका जन्म तो अवर्चीन—अभी हाल का है और सूर्य का जन्म बहुत पुराना है अर्थात् कल्प के आदि में हो चुका था; तब मैं इस बात को कैसे समझूँ कि आप ही ने कल्प के आदि में सूर्य से यह योग कहा था|
🌸 English Meaning
Arjuna said: You are of recent origin, while the birth of Vivasvan dates back to remote antiquity. How, then, am I to believe that You taught this Yoga at the beginning of creations?
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 4
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
