Bhagavad Gita 4.30 — 30
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 30
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अपरे नियताहाराः प्राणान्प्राणेषु जुह्वति |सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपितकल्मषाः |
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apare niyatāhārāḥ prāṇānprāṇeṣu juhvati .sarve.apyete yajñavido yajñakṣapitakalmaṣāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
ये सभी साधक यज्ञों द्वारा पापों का नाश कर देने वाले और यज्ञों को जानने वाले हैं|
🌸 English Meaning
All these are knowers of sacrifice, whose sins are destroyed by sacrifice.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 30
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
