Bhagavad Gita 4.27 — 27
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 27
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सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे |आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते |
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sarvāṇīndriyakarmāṇi prāṇakarmāṇi cāpare .ātmasaṃyamayogāgnau juhvati jñānadīpite
📖 सरल हिंदी अर्थ
दूसरे योगीजन इन्द्रियों की सम्पूर्ण क्रियाओं को और प्राणों की समस्त क्रियाओं को ज्ञान से प्रकाशित आत्म संयम योग रूप अग्नि में हवन किया करते हैं |
🌸 English Meaning
Others sacrifice all the functions of their senses and the functions of the vital airs into the fire of Yoga in the shape of self-control, kindled by wisdom.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 27
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
