Bhagavad Gita 4.26 — 26
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 4 | श्लोक 26
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श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति |शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति |
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śrotrādīnīndriyāṇyanye saṃyamāgniṣu juhvati .śabdādīnviṣayānanya indriyāgniṣu juhvati
📖 सरल हिंदी अर्थ
प्रसंग – इस प्रकार देवयज्ञ और अभेददर्शन रूप यज्ञ का वर्णन करने के अन्तर्गत अब इन्द्रिय संयम रूप यज्ञ का और विषय हवन रूप का वर्णन करते हैं –
🌸 English Meaning
Offer the sacrifice of the senses, beginning with the ears, to the self alone. Offer the sacrifice of the objects of the senses, beginning with sound, to the senses themselves.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 4, श्लोक 26
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
