Bhagavad Gita 3.4 — 4
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 3 | श्लोक 4
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न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते |न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति |
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na karmaṇāmanārambhānnaiṣkarmyaṃ puruṣo.aśnute .na ca saṃnyasanādeva siddhiṃ samadhigacchati
📖 सरल हिंदी अर्थ
मनुष्य न तो कर्मों का आरम्भ किये बिना निष्कर्मता को यानी योगनिष्ठा को प्राप्त होता है और न कर्मों के केवल त्याग मात्र से सिद्धि यानी सांख्यनिष्ठा को ही प्राप्त होता है |
🌸 English Meaning
Man does not attain freedom from actionwithout entering upon action; nor does he reach perfectionmerely by ceasing to act.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 4
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
