Bhagavad Gita 3.33 — 33
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 3 | श्लोक 33
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सदृशं चेष्टते स्वस्याः प्रकृतेर्ज्ञानवानपि |प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति |
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sadṛśaṃ ceṣṭate svasyāḥ prakṛterjñānavānapi .prakṛtiṃ yānti bhūtāni nigrahaḥ kiṃ kariṣyati
📖 सरल हिंदी अर्थ
सभी प्राणी प्रकृति को प्राप्त होते हैं अर्थात अपने स्वभाव से परवश हुए कर्म करते हैं, ज्ञानवान भी अपनी प्रकृति के अनुसार चेष्टा करता है। फिर इसमें किसी का हठ क्या करेगा|
🌸 English Meaning
All living creatures follow their tendencies; even the wise man acts according to the nature he has acquired. What can stubbornness do?
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 33
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
