Bhagavad Gita 3.18 — 18
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 3 | श्लोक 18
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नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन |न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः |
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naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana .na cāsya sarvabhūteṣu kaścidarthavyapāśrayaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
उस महापुरुष का इस विश्व में न तो कर्म करने से कोई प्रयोजन रहता है और न कर्मों के न करने से ही कोई प्रयोजन रहता है। तथा सम्पूर्ण प्राणियों में भी इसका किञ्चन्मात्र भी स्वार्थ का सम्बन्ध नहीं रहता|
🌸 English Meaning
In this world that great soul has no use whatsoever for things done nor for things not done; nor has he selfish dependence of any kind on any creature.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 3, श्लोक 18
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
