Bhagavad Gita 2.67 — 67
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 67
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इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते |तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि |
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indriyāṇāṃ hi caratāṃ yanmano.anuvidhīyate .tadasya harati prajñāṃ vāyurnāvamivāmbhasi
📖 सरल हिंदी अर्थ
क्योंकि जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है वह एक ही इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है |
🌸 English Meaning
As the wind carries away a boat upon the waters, even so of the senses moving among sense-objects, the one to which the mind is joined takes away his discrimination.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 67
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
