Bhagavad Gita 2.53 — 53
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 53
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श्रुतिविप्रतिपन्ना ते यदा स्थास्यति निश्चला |समाधावचला बुद्धिस्तदा योगमवाप्स्यसि |
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śrutivipratipannā te yadā sthāsyati niścalā .samādhāvacalā buddhistadā yogamavāpsyasi
📖 सरल हिंदी अर्थ
भाँति-भाँति के वचनों को सुनने से विचलित हुई तेरी बुद्धि जब परमात्मा में अचल और स्थिर ठहर जायेगी, तब तू योग को प्राप्त हो जायेगा अर्थात तेरा परमात्मा से नित्य संयोग हो जायेगा |
🌸 English Meaning
When your intellect, confused by hearing conflicting statements, will rest, steady and undistractedon God, you will then attain Yoga.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 53
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
