Bhagavad Gita 2.50 — 50
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 50
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बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते |तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् |
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buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte .tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam
📖 सरल हिंदी अर्थ
समबुद्धि युक्त पुरुष पुण्य और पाप दोनों को इसी लोक में त्याग देता है अर्थात् उनसे मुक्त हो जाता है। इससे तू समत्व रूप योग में लग जा; यह समत्व रूप योग ही कर्मों में कुशलता है अर्थात् कर्मबन्धन से छुटने का उपाय है |
🌸 English Meaning
Endowed with equanimity, one sheds in this life both good and evil. Therefore, strive for the practice of this Yoga of equanimity. Skill in action lies inYoga.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 50
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
