Bhagavad Gita 2.46 — 46
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 46
❖ ───── ✦ ───── ❖
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके |तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः |
❧ ✦ ❧
yāvānartha udapāne sarvataḥ samplutodake .tāvānsarveṣu vedeṣu brāhmaṇasya vijānataḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
सब ओर से परिपूर्ण जलाशय के प्राप्त हो जाने पर छोटे जलाशय में मनुष्य का जितना प्रयोजन रहता है, ब्रह्म को तत्व से जानने वाले ब्राह्मण का समस्त वेदों में उतना ही प्रयोजन रह जाता है|
🌸 English Meaning
A Brahmana, who has obtained enlightenment, has the same use for all the Vedas as one who stands at the brink of a sheet of water overflowing on all sides has for a small reservoir of water.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 46
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
