Bhagavad Gita 2.42 — 42
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 42
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यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः |वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः |
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yāmimāṃ puṣpitāṃ vācaṃ pravadantyavipaścitaḥ .vedavādaratāḥ pārtha nānyadastīti vādinaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे अर्जुन! जो अविवेकीजन वेदों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मानते, वे वेदों की पुष्पित वाणी को कहते हैं।|
🌸 English Meaning
Arjuna, those unwise ones who are devoted to the letter of the Vedas and argue that there is nothing beyond heaven, utter flowery speech.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 42
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
