Bhagavad Gita 2.40 — 40
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 2 | श्लोक 40
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नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते |स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् |
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nehābhikramanāśo.asti pratyavāyo na vidyate .svalpamapyasya dharmasya trāyate mahato bhayāt
📖 सरल हिंदी अर्थ
इस कर्मयोग में आरम्भ का अर्थात् बीज का नाश नहीं है और उलटा फलस्वरूप दोष भी नहीं है; बल्कि इस कर्मयोग रूप धर्म का थोड़ा सा भी साधन जन्म-रूप महान् भय से रक्षा कर लेता है |
🌸 English Meaning
In this paththere is no loss of effort, nor is there fear of contrary result. Even a little practice of this discipline saves one from the terrible fear of birth and death.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 2, श्लोक 40
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
