Bhagavad Gita 18.8 — 8
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 18 | श्लोक 8
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दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत् |स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत् |
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duḥkhamityeva yatkarma kāyakleśabhayāttyajet .sa kṛtvā rājasaṃ tyāgaṃ naiva tyāgaphalaṃ labhet
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो कुछ कर्म है वह सब दुःख रूप ही है—ऐसा समझकर यदि कोई शारीरिक क्लेश के भय से कर्तव्य-कर्मों का त्याग कर दे, तो वह ऐसा राजस त्याग करके त्याग के फल को किसी प्रकार भी नहीं पाता |
🌸 English Meaning
Should anyone give up his duties for fear of physical strain, thinking that all action is verily of the nature of discomfort,—practising such Rajasika form of renunciation, he reaps not the fruit renunciation.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 8
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
