Bhagavad Gita 18.71 — 71
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 18 | श्लोक 71
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श्रद्धावाननसूयश्च शृणुयादपि यो नरः |सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम् |
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śraddhāvānanasūyaśca śṛṇuyādapi yo naraḥ .so.api muktaḥ śubhā.Nllokānprāpnuyātpuṇyakarmaṇām
📖 सरल हिंदी अर्थ
जो मनुष्य श्रद्धायुक्त और दोषदृष्टि से रहित होकर इस गीता शास्त्र का श्रवण भी करेगा, वह भी पापों से मुक्त होकर उत्तम कर्म करने वालों के श्रेष्ठ लोकों को प्राप्त होगा |
🌸 English Meaning
The man who hears the holy Gita with reverence and in an uncarping spirit,—liberated from sin, he too shall reach the happy worlds of the virtuous.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 71
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
