Bhagavad Gita 18.58 — 58
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 18 | श्लोक 58
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मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि |अथ चेत्त्वमहंकारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि |
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maccittaḥ sarvadurgāṇi matprasādāttariṣyasi .atha cettvamahaṃkārānna śroṣyasi vinaṅkṣyasi
📖 सरल हिंदी अर्थ
उपयुक्त प्रकार से मुझमें चितवाला होकर तू मेरी कृपा से समस्त संकटों को अनायास ही पार कर जायेगा और यदि अहंकार के कारण मेरे वचनों को न सुनेगा तो नष्ट हो जायेगा अर्थात् परमार्थ से भ्रष्ट हो जायेगा |
🌸 English Meaning
With your mind thus given to Me, you shall tide over all difficulties by My grace. And if, from egotism, you will not listen, you will be lost.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 58
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
