Bhagavad Gita 18.55 — 55
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 18 | श्लोक 55
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भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः |ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् |
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bhaktyā māmabhijānāti yāvānyaścāsmi tattvataḥ .tato māṃ tattvato jñātvā viśate tadanantaram
📖 सरल हिंदी अर्थ
उस पर भक्ति के द्वारा वह मुझ परमात्मा को, मैं जो हूँ और जितना हूँ, ठीक वैसा-का-वैसा तत्व से जान लेता है; तथा उस भक्ति से मुझ को तत्व से जानकर तत्काल ही मुझमें प्रविष्ट हो जाता है |
🌸 English Meaning
Through that supreme devotion he comes to know Me in reality, what and how great I am; and thereby knowing Me in essence he forthwith enters into My being.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 55
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
