Bhagavad Gita 18.12 — 12
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 18 | श्लोक 12
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अनिष्टमिष्टं मिश्रं च त्रिविधं कर्मणः फलम् |भवत्यत्यागिनां प्रेत्य न तु संन्यासिनां क्वचित् |
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aniṣṭamiṣṭaṃ miśraṃ ca trividhaṃ karmaṇaḥ phalam .bhavatyatyāgināṃ pretya na tu saṃnyāsināṃ kvacit
📖 सरल हिंदी अर्थ
कर्म फल का त्याग न करने वाले मनुष्यों के कर्मों का तो अच्छा, बुरा और मिला हुआ—ऐसे तीन प्रकार का फल मरने के पश्चात् अवश्य होता है; किन्तु कर्मफल का त्याग कर देने वाले मनुष्यों के कर्मों का फल किसी काल में भी नहीं होता |
🌸 English Meaning
Welcome, unwelcome and mixed-threefold, indeed, is the fruit that accrues hereafter from the actions of the unrenouncing. But there is none ever for those who have renounced.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 12
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
