Bhagavad Gita 18.11 — 11
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 18 | श्लोक 11
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न हि देहभृता शक्यं त्यक्तुं कर्माण्यशेषतः |यस्तु कर्मफलत्यागी स त्यागीत्यभिधीयते |
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na hi dehabhṛtā śakyaṃ tyaktuṃ karmāṇyaśeṣataḥ .yastu karmaphalatyāgī sa tyāgītyabhidhīyate
📖 सरल हिंदी अर्थ
क्योंकि शरीरधारी किसी भी मनुष्य के द्वारा सम्पूर्णता से सब कर्मों का त्याग किया जाना शक्य नहीं है; इसलिए जो कर्मफल का त्यागी है, वही त्यागी है—यही कहा जाता है |
🌸 English Meaning
Since all actions cannot be given up in their entirety by anyone possessing a body, he alone who renounces the fruit of actions is called a man of renunciation.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 18, श्लोक 11
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
