Bhagavad Gita 17.16 — 16
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 17 | श्लोक 16
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मनः प्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः |भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते |
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manaḥ prasādaḥ saumyatvaṃ maunamātmavinigrahaḥ .bhāvasaṃśuddhirityetattapo mānasamucyate
📖 सरल हिंदी अर्थ
मन की प्रसन्नता, शांत भाव, भगवच्चिन्तन करने का स्वभाव, मन का निग्रह और अन्तःकरण के भावों की भलीभाँति पवित्रता—इस प्रकार यह मनसंबंधी तप कहा जाता है |
🌸 English Meaning
Cheerfulness of mind, placidity, habit of silence, self-restraint, purity of feelings—thus is the austerity of mind known.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 17, श्लोक 16
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
