Bhagavad Gita 16.22 — 22
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 16 | श्लोक 22
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एतैर्विमुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः |आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् |
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etairvimuktaḥ kaunteya tamodvāraistribhirnaraḥ .ācaratyātmanaḥ śreyastato yāti parāṃ gatim
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे अर्जुन ! इन तीनों नरक के द्वारों से मुक्त पुरुष अपने कल्याण का आचरण करता है, इससे वह परमगति को जाता है अर्थात् मुझको प्राप्त हो जाता है |
🌸 English Meaning
Freed from these three gates of hell, man works his own salvation and thereby attains the supreme goal i.e., God.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 16, श्लोक 22
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
