Bhagavad Gita 16.18 — 18
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 16 | श्लोक 18
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अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं च संश्रिताः |मामात्मपरदेहेषु प्रद्विषन्तोऽभ्यसूयकाः |
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ahaṃkāraṃ balaṃ darpaṃ kāmaṃ krodhaṃ ca saṃśritāḥ .māmātmaparadeheṣu pradviṣanto.abhyasūyakāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
वे अहंकार, बल, घमण्ड, कामना और क्रोधादि के परायण और दूसरों की निन्दा करने वाले पुरुष अपने और दूसरों के शरीर में स्थित मुझ अन्तर्यामी से द्वेष करने वाले होते हैं |
🌸 English Meaning
Given over to egotism, brute force, arrogance, lust and anger etc. and culminating others, they hate Medwelling in their own bodies as well as in those of others.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 16, श्लोक 18
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
