Bhagavad Gita 15.14 — 14
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 15 | श्लोक 14
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अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः |प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम् |
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ahaṃ vaiśvānaro bhūtvā prāṇināṃ dehamāśritaḥ .prāṇāpānasamāyuktaḥ pacāmyannaṃ caturvidham
📖 सरल हिंदी अर्थ
मैं ही सब प्राणियों के शरीर में स्थित रहने वाला प्राण और अपान से संयुक्त वैश्वानर अग्नि रूप होकर चार प्रकार के अन्न को पचाता हूँ|
🌸 English Meaning
Taking the form of fire lodged in the body of all creatures and united with the Pranaand Apanabreaths, it is I who consume the four kinds of food.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 15, श्लोक 14
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
