Bhagavad Gita 14.27 — 27
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 14 | श्लोक 27
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ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहममृतस्याव्ययस्य च |शाश्वतस्य च धर्मस्य सुखस्यैकान्तिकस्य च |
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brahmaṇo hi pratiṣṭhāhamamṛtasyāvyayasya ca .śāśvatasya ca dharmasya sukhasyaikāntikasya ca
📖 सरल हिंदी अर्थ
क्योंकि उस अविनाशी परब्रह्म का और अमृत का तथा नित्य धर्म का और अखण्ड एकरस आनन्द का आश्रय मैं हूँ इसलिए इनका मैं परम आश्रय हूँ |
🌸 English Meaning
For, I am the ground of the imperishable Brahma, of immortality, of the eternal virtue and of unending immutable bliss.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 14, श्लोक 27
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
