Bhagavad Gita 14.19 — 19
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 14 | श्लोक 19
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नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति |गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति |
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nānyaṃ guṇebhyaḥ kartāraṃ yadā draṣṭānupaśyati .guṇebhyaśca paraṃ vetti madbhāvaṃ so.adhigacchati
📖 सरल हिंदी अर्थ
जिस समय दृष्टा तीनों गुणों के अतिरिक्त अन्य किसी को कर्ता नहीं देखता और तीनों गुणों से अत्यन्त परे सच्चिदानन्दधन स्वरूप मुझ परमात्मा को तत्व से जानता है, उस समय वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है |
🌸 English Meaning
When the seer perceives no agent other than the three Gunas; and realizes Me, the supreme Spirit standing entirely beyond these Gunas, he enters into My Being.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 14, श्लोक 19
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
