Bhagavad Gita 13.35 — 35
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 13 | श्लोक 35
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क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुषा |nभूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर्यान्ति ते परम्
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kṣetrakṣetrajñayorevamantaraṃ jñānacakṣuṣā .bhūtaprakṛtimokṣaṃ ca ye viduryānti te param
📖 सरल हिंदी अर्थ
इस प्रकार क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ के भेद को तथा कार्य सहित प्रकृति से मुक्त होने को जो पुरुष ज्ञान-नेत्रों द्वारा तत्त्व से जानते हैं, वे महात्माजन परम ब्रह्म परमात्मा को प्राप्त होते हैं ॥
🌸 English Meaning
Arjuna, as the one sun illumines this entire universe, so the one Atmaillumines the whole Ksetra.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 35
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
