Bhagavad Gita 13.19 — 19
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 13 | श्लोक 19
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इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः |मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते |
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iti kṣetraṃ tathā jñānaṃ jñeyaṃ coktaṃ samāsataḥ .madbhakta etadvijñāya madbhāvāyopapadyate
📖 सरल हिंदी अर्थ
इस प्रकार क्षेत्र तथा ज्ञान और जानने योग्य परमात्मा का स्वरूप संक्षेप से कहा गया। मेरा भक्त इसको तत्त्व से जानकर मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है॥
🌸 English Meaning
Thus the truth of the Ksetra and knowledge, as well as of the object worth knowing, God has been briefly discussed; knowing this in reality, My devotee enters into My Being.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 19
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
