Bhagavad Gita 13.15 — 15
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 13 | श्लोक 15
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सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् |असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च |
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sarvendriyaguṇābhāsaṃ sarvendriyavivarjitam .asaktaṃ sarvabhṛccaiva nirguṇaṃ guṇabhoktṛ ca
📖 सरल हिंदी अर्थ
वह सम्पूर्ण इन्द्रियों के विषयों को जानने वाला है, परन्तु वास्तव में सब इन्द्रियों से रहित है, तथा आसक्ति रहित होने पर भी सबका धारण- पोषण करने वाला और निर्गुण होने पर भी गुणों को भोगने वाला है ॥
🌸 English Meaning
Though perceiving all sense-objects it is, really speaking, devoid of all senses. Nay, though unattached, it is the sustainer of all nonetheless; and though attributeless, it is the enjoyer of qualities.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 13, श्लोक 15
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
