Bhagavad Gita 12.4 — 4
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 12 | श्लोक 4
❖ ───── ✦ ───── ❖
सन्नियम्येन्द्रियग्रामं सर्वत्र समबुद्धयः |ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रताः |
❧ ✦ ❧
sanniyamyendriyagrāmaṃ sarvatra samabuddhayaḥ .te prāpnuvanti māmeva sarvabhūtahite ratāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
इन्द्रिय समुदाय को सम्यक् प्रकार से नियमित करके, सर्वत्र समभाव वाले, भूतमात्र के हित में रत वे भक्त मुझे ही प्राप्त होते हैं।
🌸 English Meaning
Having restrained all the senses, even-minded everywhere, intent on the welfare of all beings verily they also come unto Me
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 12, श्लोक 4
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
