Bhagavad Gita 12.2 — 2
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 12 | श्लोक 2
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श्रीभगवानुवाच |मय्यावेश्य मनो ये मां नित्ययुक्ता उपासते |श्रद्धया परयोपेताः ते मे युक्ततमा मताः |
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śrībhagavānuvāca .mayyāveśya mano ye māṃ nityayuktā upāsate .śraddhayā parayopetāḥ te me yuktatamā matāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा—मुझमें मन को एकाग्र करके निरंतर मेरे भजन-ध्यान में लगे हुए जो भक्तजन अतिशय श्रेष्ठ श्रद्धा से युक्त होकर मुझ सगुण रूप परमेश्वर को भजते हैं, वे मुझ को योगियों में अति उत्तम योगी मान्य हैं|
🌸 English Meaning
Shree Bhagavan said: I consider them to be the best Yogis, who endowed with supreme faith, and ever united through meditation with Me, worship Me with the mind centred on Me.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 12, श्लोक 2
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
