Bhagavad Gita 11.49 — 49
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 49
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मा ते व्यथा मा च विमूढभावोदृष्ट्वा रूपं घोरमीदृङ्ममेदम् |व्यपेतभीः प्रीतमनाः पुनस्त्वंतदेव मे रूपमिदं प्रपश्य |
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mā te vyathā mā ca vimūḍhabhāvo dṛṣṭvā rūpaṃ ghoramīdṛṅmamedam .vyapetabhīḥ prītamanāḥ punastvaṃ tadeva me rūpamidaṃ prapaśya
📖 सरल हिंदी अर्थ
मेरे इस प्रकार के इस विकराल रूप को देखकर तुझको व्याकुलता नहीं होनी चाहिये और मोहभाव भी नहीं होना चाहिये। तू भय रहित और प्रीतियुक्त मनवाला होकर उसी मेरे इस शंख-चक्र-गदा-पद्मयुक्त चतुर्भुज रूप को फिर देख |
🌸 English Meaning
Seeing such a dreadful Form of Mine as this, be not perturbed or perplexed; with a fearless and complacent mind, behold once again the same four-armed Form of Mine.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 49
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
