Bhagavad Gita 11.32 — 32
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 32
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श्रीभगवानुवाच |कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धोलोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः |ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वेयेऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः |
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śrībhagavānuvāca .kālo.asmi lokakṣayakṛtpravṛddho lokānsamāhartumiha pravṛttaḥ .ṛte.api tvāṃ na bhaviṣyanti sarve ye.avasthitāḥ pratyanīkeṣu yodhāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
श्रीभगवान ने कहा – मैं लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ महाकाल हूँ। इस समय इन लोकों को नष्ट करने के लिये प्रवृत्त हुआ हूँ। इसलिये जो प्रतिपक्षियों की सेना में स्थित योद्धा लोग हैं वे सब तेरे बिना भी नहीं रहेंगे अर्थात तेरे युद्ध न करने पर भी इन सबका नाश हो जायेगा |
🌸 English Meaning
Shree Bhagavan said: I am inflamed Kala, the destroyer of the worlds. I am out to exterminate these people. Even without you all those warriors arrayed in the enemy’s camp must die.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 32
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
