Bhagavad Gita 11.28 — 28
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 28
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यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाःसमुद्रमेवाभिमुखा द्रवन्ति |तथा तवामी नरलोकवीराविशन्ति वक्त्राण्यभिविज्वलन्ति |
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yathā nadīnāṃ bahavo.ambuvegāḥ samudramevābhimukhā dravanti .tathā tavāmī naralokavīrā viśanti vaktrāṇyabhivijvalanti
📖 सरल हिंदी अर्थ
जैसे नदियों के बहुत-से जल के प्रवाह स्वाभाविक ही समुद्र के ही सम्मुख दौड़ते हैं अर्थात समुद्र में प्रवेश करते हैं, वैसे ही वे नरलोक के वीर भी आपके प्रज्वलित मुखों में प्रवेश कर रहे हैं| जैसे पतंग मोहवश नष्ट होने के लिये प्रज्वलित अग्नि में अतिवेग से दौड़ते हुए प्रवेश करते हैं, वैसे ही ये सब लोग भी अपने नाश के लिये आपके मुखों में अतिवेग से दौड़ते हुए प्रवेश कर रहे हैं|
🌸 English Meaning
Just as many swift rivers, rushing headlong, enter the ocean, so do these heroes of the human world enter Your blazing mouths. As the myriad streams of rivers rush towards the sea alone, so do those warriors of the mortal world enter Your flaming mouths.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 28
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
