Bhagavad Gita 11.24 — 24
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 24
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नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णंव्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम् |दृष्ट्वा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्माधृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो |
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nabhaḥspṛśaṃ dīptamanekavarṇaṃ vyāttānanaṃ dīptaviśālanetram .dṛṣṭvā hi tvāṃ pravyathitāntarātmā dhṛtiṃ na vindāmi śamaṃ ca viṣṇo
📖 सरल हिंदी अर्थ
क्योंकि हे विष्णो ! आकाश को स्पर्श करने वाले, देदीप्यमान, अनेक वर्णों से युक्त तथा फैलाये हुए मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत अन्तःकरण वाला मैं धीरज और शान्ति नहीं पाता हूँ |
🌸 English Meaning
Because, O Vishnu! touching the sky, radiant, adorned with many colors, with spreading mouths and large luminous eyes, seeing You, my inner self is terrified; I cannot maintain my composure or peace.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 24
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
