Bhagavad Gita 11.13 — 13
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 13
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तत्रैकस्थं जगत्कृत्स्नं प्रविभक्तमनेकधा |अपश्यद्देवदेवस्य शरीरे पाण्डवस्तदा |
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tatraikasthaṃ jagatkṛtsnaṃ pravibhaktamanekadhā .apaśyaddevadevasya śarīre pāṇḍavastadā
📖 सरल हिंदी अर्थ
पाण्डु पुत्र अर्जुन ने उस समय अनेक प्रकार से विभक्त अर्थात् पृथक्-पृथक् सम्पूर्ण जगत् को देवों के देव श्रीकृष्ण भगवान के उस शरीर में एक जगह स्थित देखा। |
🌸 English Meaning
Concentrated at one place in the person of that supreme Deity, Arjuna then beheld the whole universe with its manifold divisions.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 13
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
