Bhagavad Gita 11.11 — 11
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 11 | श्लोक 11
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दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् |सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् |
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divyamālyāmbaradharaṃ divyagandhānulepanam .sarvāścaryamayaṃ devamanantaṃ viśvatomukham
📖 सरल हिंदी अर्थ
दिव्य माला और वस्त्रों को धारन किये हुए और दिव्य गन्ध का सारे शरीर में लेप किये हुए, सब प्रकार के आश्चर्यों से युक्त, सीमा रहित और सब ओर मुख किये हुए विराट् स्वरूप परमदेव परमेश्वर को अर्जुन ने देखा |
🌸 English Meaning
wearing divine garlands and clothes, besmeared all over with divine sandal-pastes, full of all wonders, infinite and having faces on all sides.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 11, श्लोक 11
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
