Bhagavad Gita 10.5 — 5
🔱
🔱
ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 10 | श्लोक 5
❖ ───── ✦ ───── ❖
अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः |भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः |
❧ ✦ ❧
ahiṃsā samatā tuṣṭistapo dānaṃ yaśo.ayaśaḥ .bhavanti bhāvā bhūtānāṃ matta eva pṛthagvidhāḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
अहिंसा, समता, तुष्टि, तपस्या, दान, यश और अपयश ये भाव प्राणियों में मेरे मत से पृथ्वी पर विद्यमान हैं|
🌸 English Meaning
Non-violence, equanimity, contentment, austerity, charity, fame and obloquy—these diverse traits of creatures emanate from me alone.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 10, श्लोक 5
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
