Bhagavad Gita 10.25 — 25
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 10 | श्लोक 25
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महर्षीणां भृगुरहं गिरामस्म्येकमक्षरम् |यज्ञानां जपयज्ञोऽस्मि स्थावराणां हिमालयः |
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maharṣīṇāṃ bhṛgurahaṃ girāmasmyekamakṣaram .yajñānāṃ japayajño.asmi sthāvarāṇāṃ himālayaḥ
📖 सरल हिंदी अर्थ
मैं महर्षियों में भृगु और शब्दों में एक अक्षर अर्थात् ओंकार हूँ। सब प्रकार के यज्ञों में जपयज्ञ और स्थिर रहने वालों में हिमालय पहाड़ हूँ|
🌸 English Meaning
Among the great seers, I am Bhrgu; among words, I am the sacred syllable OM. Among offerings, I am the offering of Japa; and among the immovables, the Himalaya.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 10, श्लोक 25
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
