Bhagavad Gita 1.38 — 38
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 1 | श्लोक 38
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यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः |कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् |
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yadyapyete na paśyanti lobhopahatacetasaḥ .kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ mitradrohe ca pātakam
📖 सरल हिंदी अर्थ
यद्यपि लोभ से भ्रष्टचित हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते,
🌸 English Meaning
Even if these people, with minds blinded by greed; perceive no evil in destroying their own race
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1, श्लोक 38
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
