Bhagavad Gita 1.32 — 32
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 1 | श्लोक 32
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न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च |किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा |
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na kāṅkṣe vijayaṃ kṛṣṇa na ca rājyaṃ sukhāni ca .kiṃ no rājyena govinda kiṃ bhogairjīvitena vā
📖 सरल हिंदी अर्थ
हे कृष्ण ! मैं न तो विजय चाहता हूँ और न राज्य तथा सुखों को ही । हे गोविन्द ! हमें ऐसे राज्य से क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है ? |
🌸 English Meaning
Krishna, I do not covet victory, nor kingdom nor pleasures. Govinda, of what use will kingdom, or luxuries, or even life be to us!
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1, श्लोक 32
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
