Bhagavad Gita 1.28 — 28
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ॐ
श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 1 | श्लोक 28
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कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् |अर्जुन उवाच |दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् |
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kṛpayā parayāviṣṭo viṣīdannidamabravīt .arjuna uvāca .dṛṣṭvemaṃ svajanaṃ kṛṣṇa yuyutsuṃ samupasthitam
📖 सरल हिंदी अर्थ
अर्जुन ने कहा—हे कृष्ण ! युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इस स्वजन समुदाय को देखकर मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कम्प एवं रोमाञ्च हो रहा है ।। २८वेंका उत्तरार्ध और २६ ।।
🌸 English Meaning
Arjuna said—O Krishna! Seeing my own kinsmen eager to fight, my limbs are weakening, my mouth is drying up, and my body is trembling with shivers and goosebumps.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 1, श्लोक 28
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
