Bhagavad Gita 16.12 — 12
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श्रीमद्भगवद्गीता • SANATAN WISDOM
भगवद्गीता
A Timeless Guide to Life
अध्याय 16 | श्लोक 12
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आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः |ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् |
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āśāpāśaśatairbaddhāḥ kāmakrodhaparāyaṇāḥ .īhante kāmabhogārthamanyāyenārthasañcayān
📖 सरल हिंदी अर्थ
वे आशा की सैकड़ों फाँसियों से बँधे हुए मनुष्य काम-क्रोध के परायण होकर विषय-भोगों के लिये अन्यायपूर्वक धनादि पदार्थों को संग्रह करने की चेष्टा करते रहते हैं|
🌸 English Meaning
Bound by hundreds of snares of desire, devoted to lust and anger, they unjustly accumulate wealth and other objects for the sake of sensuous enjoyment.
🪔 Life Lesson
इस श्लोक के संदेश को अपने दैनिक जीवन में समझें और अपने कर्म, विचार तथा आचरण में अपनाने का प्रयास करें।
Source: श्रीमद्भगवद्गीता — अध्याय 16, श्लोक 12
“Do Your Duty. Leave the Rest to the Divine.”
ॐ तत्सत्
ॐ तत्सत्
